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शहर को सुंदर और प्रदूषण मुक्त बनाने के नाम पर जनता के टैक्स के पैसे को किस तरह ठिकाने लगाया जाता है, इसका जीता-जागता उदाहरण शहर के बीचों-बीच स्थित झांसी की रानी चौक पर देखा जा सकता है। यहाँ लाखों रुपये की लागत से बनाई गई ग्रीन वॉल (वर्टिकल गार्डन) आज नगर पालिका प्रशासन की घोर उदासीनता के कारण खुद बदहाली के आंसू रो रही है। कागजों में मुजफ्फरनगर को हरा-भरा दिखाने का दावा करने वाली यह दीवार धरातल पर पूरी तरह सूख चुकी है।स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का आरोप है कि नगर पालिका के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की दिलचस्पी सिर्फ योजनाओं के उद्घाटन और अखबारों में फोटो खिंचवाने तक सीमित है। उद्घाटन के बाद इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को इसके हाल पर छोड़ दिया गया। देखरेख और समय पर पानी न मिलने के कारण दीवार पर लगे करीब 80 फीसदी पौधे सूखकर नष्ट हो चुके हैं। कई जगह से गमले गायब हैं और लोहे का ढांचा अब सिर्फ धूल फांक रहा है स्थानीय व्यापारी ने बताया कि यह सीधे तौर पर सरकारी धन का दुरुपयोग है। जब नगर पालिका के पास पौधों को पानी देने तक की व्यवस्था नहीं थी, तो लाखों रुपये का बजट क्यों ठिकाना लगाया गया ग्रीन मुजफ्फरनगर का सपना अब सिर्फ पालिका के विज्ञापनों और बोर्डों तक ही सीमित रह गया है।अब सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ सरकारी बजट को ठिकाने लगाने के लिए बिना प्लानिंग के यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया था,पौधों को पानी देने और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी या ठेकेदार की थी, और उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई,शहर के सबसे व्यस्त चौराहे पर रोजाना पालिका अधिकारियों का आना-जाना होता है, फिर भी इस बदहाली पर आंखें क्यों मूंद रखी हैं?अब देखना यह होगा कि खबर वायरल होने के बाद नगर पालिका इस ओर ध्यान देती है या नहीं
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